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20.73.2
नू चि॒न्नु ते॒ मन्य॑मानस्य द॒स्मोद॑श्नुवन्ति महि॒मान॑मुग्र । न वी॒र्यमिन्द्र ते॒ न राधः॑ ॥ (२)
शास्त्र जिज्ञासा: इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
अथर्ववेद मन्त्र 20.73.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे इंद्र! तुम उग्र हो. तुम्हारा सुंदर रूप, शक्ति, धन और महिमा को दूसरा कोई भी प्राप्त नहीं कर सकता. (२)
EN English Translation
O Indra! You're furious. No one else can get your beautiful form, power, wealth and glory. (2)