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20.74.1
यच्चि॒द्धि स॑त्य सोमपा अनाश॒स्ता इ॑व॒ स्मसि॑ । आ तू न॑ इन्द्र शंसय॒ गोष्वश्वे॑षु शु॒भ्रिषु॑ स॒हस्रे॑षु तुवीमघ ॥ (१)
शास्त्र जिज्ञासा: इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
अथर्ववेद मन्त्र 20.74.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे सोमरस का पान करने वाले इंद्र! हमारे हजारों की संख्या वाले घोड़े, गायों और शुभ्रियों के अमृत होने की बात कहो; क्योंकि तुम अमृतत्व को प्राप्त कर चुके हो. (१)
EN English Translation
O Indra, who drinks Someras! Speak of the nectar of our horses, cows and whites of thousands; Because you have attained nectar. (1)