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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 79 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 79 • मन्त्र 2

20.79.2

Mantra ID: 20.79.2

मा नो॒ अज्ञा॑ता वृ॒जना॑ दुरा॒ध्यो॒ माशि॑वासो॒ अव॑ क्रमुः । त्वया॑ व॒यं प्र॒वतः॒ शश्व॑तीर॒पोऽति॑ शूर तरामसि ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.79.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वीर इंद्र! हम पर आधियों और व्याधियों का आक्रमण न हो. अमंगलमय वाणियां तथा पाप हम पर आक्रमण न करें. हम तुम्हारी कृपा प्राप्त कर के सेवकों वाले बनें तथा सदा सफलतापूर्वक यज्ञ करते रहें. (२)

EN English Translation

O heroic Indra! We should not be attacked by elephants and diseases. Don't let evil words and sins attack us. We should receive your grace and become servants and always continue to perform yajna successfully. (2)

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