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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 83 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 83 • मन्त्र 1

20.83.1

Mantra ID: 20.83.1

इन्द्र॑ त्रि॒धातु॑ शर॒णं त्रि॒वरू॑थं स्वस्ति॒मत् । छ॒र्दिर्य॑च्छ म॒घव॑द्भ्यश्च॒ मह्यं॑ च या॒वया॑ दि॒द्युमे॑भ्यः ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.83.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! मुझे मंगलकारी घर दो तथा हिंसा करने वाली शक्तियों को यहां से दूर भगाओ. (१)

EN English Translation

O Indra! Give me a happy house and drive away the forces of violence from here. (1)

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