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20.88.2
धु॒नेत॑यः सुप्रके॒तं मद॑न्तो॒ बृह॑स्पते अ॒भि ये न॑स्तत॒स्रे । पृष॑न्तं सृ॒प्रमद॑ब्धमू॒र्वं बृह॑स्पते॒ रक्ष॑तादस्य॒ योनि॑म् ॥ (२)
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अथर्ववेद मन्त्र 20.88.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे बृहस्पति! जो ऋत्विज् तुम्हें हमारी ओर आकर्षित करते हैं उन गमनशील, अहिंसक तथा घृत की बूंदें धारण करने वाले ऋत्विजों की तुम रक्षा करो. (२)
EN English Translation
O Jupiter! Protect the movable, non-violent and ritvijas who attract you to us. (2)