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20.88.5
स सु॒ष्टुभा॒ स ऋक्व॑ता ग॒णेन॑ व॒लं रु॑रोज फलि॒गं रवे॑ण । बृह॒स्पति॑रु॒स्रिया॑ हव्य॒सूदः॒ कनि॑क्रद॒द्वाव॑शती॒रुदा॑जत् ॥ (५)
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अथर्ववेद मन्त्र 20.88.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
त्रचा वाले गों के द्वारा वे बृहस्पति मेघों को चीरते हैं. वे हव्य से प्रेरित हो कर इच्छा करने वाली गायों को प्राप्त होते हैं और बारबार शब्द करते हैं. (५)
EN English Translation
They rip the Jupiter clouds through the glass of the tree. They are inspired by eve and get the cows they desire and say words again and again. (5)