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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 91 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 91 • मन्त्र 3

20.91.3

Mantra ID: 20.91.3

हं॒सैरि॑व॒ सखि॑भि॒र्वाव॑दद्भिरश्म॒न्मया॑नि॒ नह॑ना॒ व्यस्य॑न् । बृह॒स्पति॑रभि॒कनि॑क्रद॒द्गा उ॒त प्रास्तौ॒दुच्च॑ वि॒द्वाँ अ॑गायत् ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.91.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

गर्जन करने वाले मेघों का उदघाटन करते हुए बृहस्पति स्तुति करते हैं. इसी कारण वे विद्वान्‌ समझे जाते हैं. (३)

EN English Translation

Jupiter praises while inaugurating the roaring clouds. That is why they are considered scholars. (3)

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