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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 99 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 99 • मन्त्र 2

20.99.2

Mantra ID: 20.99.2

अ॒स्येदिन्द्रो॑ वावृधे॒ वृष्ण्यं॒ शवो॒ मदे॑ सु॒तस्य॒ विष्ण॑वि । अ॒द्या तम॑स्य महि॒मान॑मा॒यवोऽनु॑ ष्टुवन्ति पू॒र्वथा॑ ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.99.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

तैयार किए हुए सोम रस के द्वारा हर्ष प्राप्त होने पर वे इंद्र यजमान के धन और बल की वृद्धि करते हैं. स्तुति करने वाले ये जन उन इंद्र की महिमा को ही पहले के समान गाते हैं. (२)

EN English Translation

When happiness is received through the prepared Soma Rasa, they increase the wealth and strength of indra host. These people who praise them sing the glory of Indra as before. (2)

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