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अथर्ववेद

Kanda 3 • Sukta 11 • Mantra 6

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 3 • सूक्त 11 • मन्त्र 6

3.11.6

Mantra ID: 3.11.6

इ॒हैव स्तं॑ प्राणापानौ॒ माप॑ गातमि॒तो यु॒वम् । शरी॑रम॒स्याङ्गा॑नि ज॒रसे॑ वहतं॒ पुनः॑ ॥ (६)

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अथर्ववेद मन्त्र 3.11.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे प्राण और अपान वायु! तुम इस के शरीर में ही रहो, इस के शरीर से अकाल में ही मत निकलो. इस रोगी व्यक्ति के शरीर के हस्त, चरण आदि अंगों को तुम वृद्धावस्था तक मत त्यागो. (६)

EN English Translation

O life and your air! You stay in his body, do not come out of his body in famine. Do not leave the hands, feet, etc. of this patient's body till old age. (6)

卐 HinduText AI