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अथर्ववेद

Kanda 3 • Sukta 29 • Mantra 8

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 3 • सूक्त 29 • मन्त्र 8

3.29.8

Mantra ID: 3.29.8

भूमि॑ष्ट्वा॒ प्रति॑ गृह्णात्व॒न्तरि॑क्षमि॒दं म॒हत् । माहं प्रा॒णेन॒ मात्मना॒ मा प्र॒जया॑ प्रति॒गृह्य॒ वि रा॑धिषि ॥ (८)

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अथर्ववेद मन्त्र 3.29.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे दक्षिणा द्रव्य! तुझे यह धरती और विशाल आकाश ग्रहण करे. इसीलिए तुझे ग्रहण कर के मैं प्राण से, आत्मा से और पुत्रपौत्र आदि संतान से हीन न बनूं. (८)

EN English Translation

O Dakshina Dravya! May this earth and the vast sky receive you. That is why by accepting you, I should not become inferior to the soul, the soul and the son grandson etc. (8)

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