Popular:
अथर्ववेद

Kanda 4 • Sukta 16 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 4 • सूक्त 16 • मन्त्र 2

4.16.2

Mantra ID: 4.16.2

यस्तिष्ठ॑ति॒ चर॑ति॒ यश्च॑ वञ्चति॒ यो नि॒लायं॒ चर॑ति॒ यः प्र॒तङ्क॑म् । द्वौ सं॑नि॒षद्य॒ यन्म॒न्त्रये॑ते॒ राजा॒ तद्वे॑द॒ वरु॑णस्तृ॒तीयः॑ ॥ (२)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 4.16.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो शत्रु सामने खड़ा होता है, जो चलता है, जो कुटिलतापूर्वक ठगता है, जो छिप कर प्रतिकूल आचरण करता है तथा जो शत्रु कष्टमय जीवन पा कर विरोध करता है, महान वरुण इन सभी शत्रुओं को समय से देखते हैं. दो व्यक्ति एकांत में बैठ कर जो गुप्त मंत्रणा करते हैं, उसे राजा वरुण तीसरे के रूप में जानते हैं. (२)

EN English Translation

The enemy who stands in front, who walks, who cheats crookedly, who behaves in secret and who opposes the enemy after getting a painful life, the great Varuna sees all these enemies from time to time. King Varuna knows the secret advice that two people sit in solitude and do as the third. (2)

卐 HinduText AI