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अथर्ववेद

Kanda 4 • Sukta 21 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 4 • सूक्त 21 • मन्त्र 1

4.21.1

Mantra ID: 4.21.1

आ गावो॑ अग्मन्नु॒त भ॒द्रम॑क्र॒न्त्सीद॑न्तु गो॒ष्ठे र॒णय॑न्त्व॒स्मे । प्र॒जाव॑तीः पुरु॒रूपा॑ इ॒ह स्यु॒रिन्द्रा॑य पू॒र्वीरु॒षसो॒ दुहा॑नाः ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 4.21.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

गाएं हमारी ओर आएं, हमारा कल्याण करें, हमारी गोशाला में बैठे तथा हमें दूध आदि दे कर प्रसन्न करें. श्वेत, कृष्ण आदि अनेक वर्णो की गाएं अधिक संतान वाली हो कर यजमान के घर में समृद्ध बनें तथा अधिक समय तक इंद्र के निमित्त दूध देती रहें. (१)

EN English Translation

Cows come towards us, do us welfare, sit in our gaushala and please us by giving us milk etc. The cows of many varnas like White, Krishna etc. should be more children and become rich in the host's house and keep giving milk for Indra for a long time. (1)

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