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अथर्ववेद

Kanda 4 • Sukta 27 • Mantra 6

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 4 • सूक्त 27 • मन्त्र 6

4.27.6

Mantra ID: 4.27.6

यदीदि॒दं म॑रुतो॒ मारु॑तेन॒ यदि॑ देवा॒ दैव्ये॑ने॒दृगार॑ । यू॒यमी॑शिध्वे वसव॒स्तस्य॒ निष्कृ॑ते॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः ॥ (६)

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अथर्ववेद मन्त्र 4.27.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मरुतो! यदि मेरा दुःख अथवा दुःख का कारण पाप मुझे मरुत्‌ संबंधी अपराध के कारण प्राप्त हुआ है, हे इंद्र आदि देवो! यदि मुझे यह दुःख देव संबंधी अपराध के कारण प्राप्त हुआ है तो हे मरुतो! इस दुःख अथवा पाप को मिटाने में तुम समर्थ हो. तुम मुझे पाप से छुड़ाओ. (६)

EN English Translation

O Maruto! If my sin has been caused by my sorrow or sorrow due to the sin of death, O Indra Adi Devo! If I have received this sorrow because of the guilt of God, then O Maruto! You are capable of eliminating this sorrow or sin. You redeem me from sin. (6)

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