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अथर्ववेद

Kanda 4 • Sukta 29 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 4 • सूक्त 29 • मन्त्र 3

4.29.3

Mantra ID: 4.29.3

यावङ्गि॑रस॒मव॑थो॒ याव॒गस्तिं॒ मित्रा॑वरुणा ज॒मद॑ग्नि॒मत्त्रि॑म् । यौ क॒श्यप॒मव॑थो॒ यौ वसि॑ष्ठं॒ तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 4.29.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मित्र और वरुण! तुम अगस्त्य, अंगिरस, जमदग्नि एवं अत्रि ऋषि की रक्षा करते हो. जिन मित्र और वरुण ने कश्यप और वसिष्ठ ऋषियों की रक्षा की, वे हमें पाप से छुड़ाएं. (३)

EN English Translation

Hey friend and Varun! You protect Agastya, Angiras, Jamadagni and Atri Rishi. May the friends and Varuna who protected Kashyapa and Vasishtha rishis redeem us from sin. (3)

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