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अथर्ववेद

Kanda 4 • Sukta 29 • Mantra 6

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 4 • सूक्त 29 • मन्त्र 6

4.29.6

Mantra ID: 4.29.6

यौ मेधा॑तिथि॒मव॑थो॒ यौ त्रि॒शोकं॒ मित्रा॑वरुणावु॒शनां॑ का॒व्यं यौ । यौ गोत॑म॒मव॑थः॒ प्रोत मुद्ग॑लं॒ तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः ॥ (६)

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अथर्ववेद मन्त्र 4.29.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिन मित्र और वरुण ने मेधातिथि, त्रिशक तथा शुक्राचार्य के पुत्र उशना ऋषि की रक्षा की, जिन्होंने गोतम एवं मुद्गल ऋषि की रक्षा की, वे हमें पाप से छुड़ाएं. (६)

EN English Translation

The friends and Varuna who protected Ushna Rishi, son of Medhatithi, Trishak and Shukracharya, who protected Gotam and Mudgal Rishi, should save us from sin. (6)

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