Atharvaveda Quick Jump
Navigate to any Kanda or Mantra
4.39.3
अ॒न्तरि॑क्षे वा॒यवे॒ सम॑नम॒न्त्स आ॑र्ध्नोत् । यथा॒न्तरि॑क्षे वा॒यवे॑ स॒मन॑मन्ने॒वा मह्यं॑ सं॒नमः॒ सं न॑मन्तु ॥ (३)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
अथर्ववेद मन्त्र 4.39.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
अंतरिक्ष में अधिपति के रूप में स्थित वायु के लिए यक्ष, गंधर्व आदि ने भलीभांति नमस्कार किया. वायु उन के नमस्कार से प्रसन्न हुए. जिस प्रकार गंधर्व आदि ने अंतरिक्ष में वायु के लिए नमस्कार किया, उसी प्रकार वह मेरे लिए नमस्कार करें. (३)
EN English Translation
Yaksha, Gandharva etc. greeted the air located as the ruler in space. Vayu was pleased with his greetings. Just as Gandharva etc. saluted for air in space, so should he greet me. (3)