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अथर्ववेद

Kanda 4 • Sukta 8 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 4 • सूक्त 8 • मन्त्र 7

4.8.7

Mantra ID: 4.8.7

ए॒ना व्या॒घ्रं प॑रिषस्वजा॒नाः सिं॒हं हि॑न्वन्ति मह॒ते सौभ॑गाय । स॑मु॒द्रं न॑ सु॒भुव॑स्तस्थि॒वांसं॑ मर्मृ॒ज्यन्ते॑ द्वी॒पिन॑म॒प्स्वन्तः ॥ (७)

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अथर्ववेद मन्त्र 4.8.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

नदी के रूप में जल जिस प्रकार सागर को प्रसन्न करते हैं, उसी प्रकार दिव्य जल राजा को शक्तिशाली बनाएं. जिस प्रकार माता पुत्र का आलिंगन करती है, उसी प्रकार महान सौभाग्य प्राप्त करने के लिए जल राजा को शक्तिपूर्ण बनाते हैं. जल में वर्तमान गैंडे के समान अपराजेय राजा को सेवक जन अभिषेक के द्वारा और वस्त्राभूषणों से अलंकृत करें. (७)

EN English Translation

Just as water in the form of a river pleases the ocean, so make the divine water king powerful. Just as the mother embraces the son, in the same way, water makes the king powerful to get great good fortune. Decorate the unbeatable king like the present rhino in the water through servants and clothes. (7)

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