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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 11 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 11 • मन्त्र 1

5.11.1

Mantra ID: 5.11.1

क॒थं म॒हे असु॑रायाब्रवीरि॒ह क॒थं पि॒त्रे हर॑ये त्वे॒षनृ॑म्णः । पृश्निं॑ वरुण॒ दक्षि॑णां ददा॒वान्पुन॑र्मघ॒ त्वं मन॑साचिकित्सीः ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.11.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शक्तिशाली वरुण! तुम ने जगत्‌ के पालन करने वाले सूर्य से क्या कहा था? तुम सूर्य को दक्षिणा देते हो एवं मन से चिकित्सा करते हो. (१)

EN English Translation

O mighty Varuna! What did you say to the sun that follows the world? You give dakshina to the sun and heal with your mind. (1)

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