Popular:
अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 11 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 11 • मन्त्र 7

5.11.7

Mantra ID: 5.11.7

त्वं ह्यङ्ग व॑रुण॒ ब्रवी॑षि॒ पुन॑र्मघेष्वव॒द्यानि॒ भूरि॑ । मो षु प॒णीँर॑भ्ये॒ताव॑तो भू॒न्मा त्वा॑ वोचन्नरा॒धसं॒ जना॑सः ॥ (७)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 5.11.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वरुण देव! तुम बारबार धन प्राप्ति के अवसरों के विषय में बताते हो. तुम इन व्यवहार करने वालों की उपेक्षा मत करो. अन्यथा ये तुम्हें धनहीन समझने लगेंगे. (७)

EN English Translation

O Varun Dev! You repeatedly talk about the opportunities to get money. Don't ignore these behaviors. Otherwise, they will start thinking of you as moneyless. (7)

卐 HinduText AI