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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 12 • Mantra 9

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 12 • मन्त्र 9

5.12.9

Mantra ID: 5.12.9

य इ॒मे द्यावा॑पृथि॒वी जनि॑त्री रू॒पैरपिं॑श॒द्भुव॑नानि॒ विश्वा॑ । तम॒द्य हो॑तरिषि॒तो यजी॑यान्दे॒वं त्वष्टा॑रमि॒ह य॑क्षि वि॒द्वान् ॥ (९)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.12.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! जो त्वष्टा देवता द्यावा पृथ्वी तथा समस्त प्राणियों को अनेक रूप प्रदान करता है, हमारी प्रेरणा से आज उस का यजन करो. (९)

EN English Translation

O agni! The tvashta deity who gives many forms to the earth and all beings, worship him today with our inspiration. (9)

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