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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 14 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 14 • मन्त्र 1

5.14.1

Mantra ID: 5.14.1

सु॑प॒र्णस्त्वान्व॑विन्दत्सूक॒रस्त्वा॑खनन्न॒सा । दिप्सौ॑षधे॒ त्वं दिप्स॑न्त॒मव॑ कृत्या॒कृतं॑ जहि ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.14.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ओषधि! सुपर्ण अर्थात्‌ गरुड़ या सूर्य ने तुम्हें प्राप्त किया था. सुअर ने अपनी नाक से तुम्हें खोदा था. हे कृत्या से संबंधित ओषधि! तुम कृत्या का प्रयोग करने वाले और हमें मारने का प्रयत्न करने वाले का नाश करो. (१)

EN English Translation

O medicine! Suparna i.e. Garuda or Sun received you. The pig dug you with its nose. O medicine related to the act! Destroy the one who uses the act and tries to kill us. (1)

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