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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 17 • Mantra 15

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 17 • मन्त्र 15

5.17.15

Mantra ID: 5.17.15

नास्य॑ श्वे॒तः कृ॑ष्ण॒कर्णो॑ धु॒रि यु॒क्तो म॑हीयते । यस्मि॑न्रा॒ष्ट्रे नि॑रु॒ध्यते॑ ब्रह्मजा॒याचि॑त्त्या ॥ (१५)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.17.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिस राज्य में ब्राह्मण की पत्नी को चेतनाहीन कर के रोका जाता है, उस राज्य में राजा का श्वेत कानों वाला घोड़ा रथ के आगे जुत कर भी प्रशंसित नहीं होता. (१५)

EN English Translation

In a state where the Brahmin's wife is stopped by making her unconscious, the king's horse with white ears is not even admired by ploughing in front of the chariot. (15)

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