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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 17 • Mantra 16

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 17 • मन्त्र 16

5.17.16

Mantra ID: 5.17.16

नास्य॒ क्षेत्रे॑ पुष्क॒रिणी॑ ना॒ण्डीकं॑ जायते॒ बिस॑म् । यस्मि॑न्रा॒ष्ट्रे नि॑रु॒ध्यते॑ ब्रह्मजा॒याचि॑त्त्या ॥ (१६)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.17.16 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिस राष्ट्र में ब्राह्मण की पत्नी को अचेत कर के रोका जाता है, उस राष्ट्र की पुष्करिणी में कमल और कमल तंतु उत्पन्न नहीं होते. (१६)

EN English Translation

In a nation where the wife of a Brahmin is stopped by unconscious, lotus and lotus fibers are not produced in the Pushkarini of that nation. (16)

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