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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 18 • Mantra 11

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 18 • मन्त्र 11

5.18.11

Mantra ID: 5.18.11

गौरे॒व तान्ह॒न्यमा॑ना वैतह॒व्याँ अवा॑तिरत् । ये केस॑रप्राबन्धायाश्चर॒माजा॒मपे॑चिरन् ॥ (११)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.18.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वीरहव्य के वशंज जिन राजाओं ने केशर प्राबंधा नाम की चरम अजा का मांस पकाया था, उन राजाओं की मार खाते हुए गाय ने ही उन्हें छिन्नभिन्न कर दिया था. (११)

EN English Translation

The cow had shattered the kings who had cooked the meat of the extreme aja named Keshar Prabandha, who had cooked the meat of the extreme aja of Veerhavya. (11)

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