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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 2 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 2 • मन्त्र 7

5.2.7

Mantra ID: 5.2.7

स्तु॒ष्व व॑र्ष्मन्पुरु॒वर्त्मा॑नं॒ समृभ्वा॑णमि॒नत॑ममा॒प्तमा॒प्त्याना॑म् । आ द॑र्शति॒ शव॑सा॒ भूर्यो॑जाः॒ प्र स॑क्षति प्रति॒मानं॑ पृथि॒व्याः ॥ (७)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.2.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शरीरधारी पुरुष! तू उस राजा की स्तुति कर जो विचरण करने वाला, तेजस्वी, स्वामी एवं उन गुणों से युक्त है, जो आप्त जनों में होते हैं. राजा पृथ्वी का प्रतिरूप है एवं युद्ध में जुटा हुआ है. (७)

EN English Translation

O man of the body! Praise the king who is wandering, brilliant, master and possessed of the qualities that are possessed by the afflicted. The king is the replica of the earth and is engaged in war. (7)

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