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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 20 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 20 • मन्त्र 1

5.20.1

Mantra ID: 5.20.1

उ॒च्चैर्घो॑षो दुन्दु॒भिः स॑त्वना॒यन्वा॑नस्प॒त्यः संभृ॑त उ॒स्रिया॑भिः । वाचं॑ क्षुणुवा॒नो द॒मय॑न्त्स॒पत्ना॑न्त्सिं॒ह इ॑व जे॒ष्यन्न॒भि तं॑स्तनीहि ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.20.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे दुंदुभि! तू वनस्पतियों से बनाई गई है तथा उच्च स्वर करती है. तू शक्तिशाली जनों के समान आचरण कर तथा उच्च घोष से शत्रुओं का मान मर्दन कर. (१)

EN English Translation

O dundubi! You are made from vegetation and tone high. You behave like powerful people and honor the enemies with a loud voice. (1)

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