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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 22 • Mantra 10

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 22 • मन्त्र 10

5.22.10

Mantra ID: 5.22.10

यत्त्वं शी॒तोऽथो॑ रू॒रः स॒ह का॒सावे॑पयः । भी॒मास्ते॑ तक्मन्हे॒तय॒स्ताभिः॑ स्म॒ परि॑ वृङ्ग्धि नः ॥ (१०)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.22.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ज्वर! तू शीत के साथ रहता है तथा खांसी के साथ कंपित करने वाला है. तेरे आयुध भयंकर हैं. इन के साथ तू हम से दूर चला जा. (१०)

EN English Translation

O fever! You live with cold and staggering with cough. Your armaments are terrible. With these you go away from us. (10)

卐 HinduText AI