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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 22 • Mantra 9

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 22 • मन्त्र 9

5.22.9

Mantra ID: 5.22.9

अ॑न्यक्षे॒त्रे न र॑मसे व॒शी सन्मृ॑डयासि नः । अभू॑दु॒ प्रार्थ॑स्त॒क्मा स ग॑मिष्यति॒ बल्हि॑कान् ॥ (९)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.22.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ज्वर! तू अन्य स्थानों में क्यों रमण नहीं करता है? तू हमारे वश में हो कर हमें सुखी बना. हम तुझ से बाह्लीक देश में जाने की प्रार्थना करते हैं. (९)

EN English Translation

O fever! Why don't you delight in other places? You become our control and make us happy. We pray to you to go to the outer land. (9)

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