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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 23 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 23 • मन्त्र 7

5.23.7

Mantra ID: 5.23.7

येवा॑षासः॒ कष्क॑षास एज॒त्काः शि॑पवित्नु॒काः । दृ॒ष्टश्च॑ ह॒न्यतां॒ क्रिमि॑रु॒तादृष्ट॑श्च हन्यताम् ॥ (७)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.23.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम शीघ्र गमन करने वाले, कष्ट देने वाले, कंपित करने वाले, तीक्ष्ण कृमि, दिखाई देने वाले अथवा दिखाई न देने वाले सभी कृमियों को नष्ट करो. (७)

EN English Translation

O Indra! Destroy all worms that move quickly, torment, torment, to stagger, to sharp worms, to be visible or not visible. (7)

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