Popular:
अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 24 • Mantra 14

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 24 • मन्त्र 14

5.24.14

Mantra ID: 5.24.14

य॒मः पि॑तॄ॒णामधि॑पतिः॒ स मा॑वतु । अ॒स्मिन्ब्रह्म॑ण्य॒स्मिन्कर्म॑ण्य॒स्यां पु॑रो॒धाया॑म॒स्यां प्र॑ति॒ष्ठाया॑म॒स्यां चित्त्या॑म॒स्यामाकू॑त्याम॒स्यामा॒शिष्य॒स्यां दे॒वहू॑त्यां॒ स्वाहा॑ ॥ (१४)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 5.24.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यम पितरों के अधिपति हैं. वह मेरे इस वेदोक्त पौरोहित्य कर्म में, प्रतिष्ठा में, संकल्प में देवाहूवान कर्म में तथा आशीर्वाद रूप कर्म में मेरी सहायता करें. (१४)

EN English Translation

Yama is the overswami of the ancestors. May he help me in this Vedokta Paurohitya karma of mine, in prestige, in godly deeds in resolve and in the form of blessings. (14)

卐 HinduText AI