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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 24 • Mantra 15

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 24 • मन्त्र 15

5.24.15

Mantra ID: 5.24.15

पि॒तरः॒ परे॑ ते मावन्तु । अ॒स्मिन्ब्रह्म॑ण्य॒स्मिन्कर्म॑ण्य॒स्यां पु॑रो॒धाया॑म॒स्यां प्र॑ति॒ष्ठाया॑म॒स्यां चित्त्या॑म॒स्यामाकू॑त्याम॒स्यामा॒शिष्य॒स्यां दे॒वहू॑त्यां॒ स्वाहा॑ ॥ (१५)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.24.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सात पीढ़ियों के ऊपर के पितर इस वेदोक्त पौरोहित्य कर्म में, संकल्प में प्रतिष्ठा में, देवाहवान कर्म में तथा आशीर्वाद रूप कर्म में मेरी रक्षा करें. (१५)

EN English Translation

May the ancestors of the above seven generations protect me in this Vedukta Paurohita karma, in prestige in resolve, in devavan karma and in action as a blessing. (15)

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