Popular:
अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 24 • Mantra 8

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 24 • मन्त्र 8

5.24.8

Mantra ID: 5.24.8

वा॒युर॒न्तरि॑क्ष॒स्याधि॑पतिः॒ स मा॑वतु । अ॒स्मिन्ब्रह्म॑ण्य॒स्मिन्कर्म॑ण्य॒स्यां पु॑रो॒धाया॑म॒स्यां प्र॑ति॒ष्ठाया॑म॒स्यां चित्त्या॑म॒स्यामाकू॑त्याम॒स्यामा॒शिष्य॒स्यां दे॒वहू॑त्यां॒ स्वाहा॑ ॥ (८)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 5.24.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वायु देव अंतरिक्ष के अधिपति हैं. वे इस वेदोक्त पौराहित्य कर्म में, प्रतिष्ठा में, संकल्प में, देवाहवान कर्म में तथा आशीर्वाद रूप कर्म में मेरी रक्षा करें. (८)

EN English Translation

Vayu Dev is the overswami of space. May they protect me in this Vedokta Paurahitaya karma, in prestige, in resolve, in divine deeds and in action as blessings. (8)

卐 HinduText AI