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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 26 • Mantra 8

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 26 • मन्त्र 8

5.26.8

Mantra ID: 5.26.8

त्वष्टा॑ युनक्तु बहु॒धा नु रू॒पा अ॒स्मिन्य॒ज्ञे यु॑नक्तु सु॒युजः॒ स्वाहा॑ ॥ (८)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.26.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

त्वष्टा देव इस यज्ञ में भलीभांति संभाले गए रूपों को संयुक्त करें. यह आहुति त्वष्टा देव के निमित्त हो. (८)

EN English Translation

Tvashta Dev should combine the well-handled forms in this yajna. This sacrifice should be for the sake of Tvashta Dev. (8)

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