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5.27.1
ऊ॒र्ध्वा अ॑स्य स॒मिधो॑ भवन्त्यू॒र्ध्वा शु॒क्रा शो॒चींष्य॒ग्नेः । द्यु॒मत्त॑मा सु॒प्रती॑कः॒ ससू॑नु॒स्तनू॒नपा॒दसु॑रो॒ भूरि॑पाणिः ॥ (१)
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अथर्ववेद मन्त्र 5.27.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
अग्नि की समिधाएं ऊंची और वीर्य तेजयुक्त होते हैं. यह अत्यंत प्रदीप्त, सुंदर एवं सूर्य के समान है. प्राणदाता अग्नि का यज्ञों में बहुत सहयोग रहता है. (१)
EN English Translation
The summings of agni are high and semen are sharp. It is very bright, beautiful and like the sun. The provider agni has a lot of support in yagyas. (1)