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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 27 • Mantra 11

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 27 • मन्त्र 11

5.27.11

Mantra ID: 5.27.11

वन॑स्प॒तेऽव॑ सृजा॒ ररा॑णः । त्मना॑ दे॒वेभ्यो॑ अ॒ग्निर्ह॒व्यं श॑मि॒ता स्व॑दयतु ॥ (११)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.27.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वनस्पति! तुम शब्द करती हुई अपनेआप को इस यज्ञ में छोड़ो तथा अग्नि इस हवि को देवों के लिए स्वादिष्ट बनाएं. (११)

EN English Translation

O vegetation! You leave yourself in this yajna by saying words and make agni delicious for the gods. (11)

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