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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 29 • Mantra 11

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 29 • मन्त्र 11

5.29.11

Mantra ID: 5.29.11

स॒नाद॑ग्ने मृणसि यातु॒धाना॒न्न त्वा॒ रक्षां॑सि॒ पृत॑नासु जिग्युः । स॒हमू॑रा॒ननु॑ दह क्र॒व्यादो॒ मा ते॑ हे॒त्या मु॑क्षत॒ दैव्या॑याः ॥ (११)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.29.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! तुम सदा से राक्षसों का मर्दन करते आए हो, राक्षस युद्ध में तुम्हें कभी नहीं जीत सके हैं, तुम मांस भक्षियों को जला दो. ये तुम्हारे दिव्य अस्त्र से बच न सकें. (११)

EN English Translation

O agni! You have always been killing demons, demons have never been able to conquer you in battle, you burn meat eaters. They cannot escape your divine weapon. (11)

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