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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 29 • Mantra 15

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 29 • मन्त्र 15

5.29.15

Mantra ID: 5.29.15

ता॑र्ष्टा॒घीर॑ग्ने स॒मिधः॒ प्रति॑ गृह्णाह्य॒र्चिषा॑ । जहा॑तु क्र॒व्याद्रू॒पं यो अ॑स्य मां॒सं जिही॑र्षति ॥ (१५)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.29.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! तृषा शांत करने वाली इन समिधाओं को घी के साथ ग्रहण करो. जो राक्षस इस पुरुष के मांस की इच्छा करता है, वह अपने कार्य से विमुख हो जाए. (१५)

EN English Translation

O agni! Take these samidhas with ghee that calm the trisha. The demon who desires the flesh of this man should turn away from his work. (15)

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