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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 29 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 29 • मन्त्र 3

5.29.3

Mantra ID: 5.29.3

यथा॒ सो अ॒स्य प॑रि॒धिष्पता॑ति॒ तथा॒ तद॑ग्ने कृणु जातवेदः । विश्वे॑भिर्दे॒वैः स॒ह सं॑विदा॒नः ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.29.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! तुम सभी देवों के साथ मिल कर ऐसा यत्न करो, जिस से उस का परकोटा गिर जाए जो हमारे विरोध में खेल खेल रहा है और जो हमें खाना चाहता है. (३)

EN English Translation

O agni! Make such an effort with all of you gods, so that the person who is playing the game against us and who wants to eat us falls. (3)

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