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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 29 • Mantra 6

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 29 • मन्त्र 6

5.29.6

Mantra ID: 5.29.6

आ॒मे सुप॑क्वे श॒बले॒ विप॑क्वे॒ यो मा॑ पिशा॒चो अश॑ने द॒दम्भ॑ । तदा॒त्मना॑ प्र॒जया॑ पिशा॒चा वि या॑तयन्तामग॒दोयम॑स्तु ॥ (६)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.29.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! जो पिशाच कच्चे, पक्के और चितकबरे पात्र में विशेष रूप से पके हुए एवं कच्चे, पक्के भोजन में इस पुरुष के मांस को घोल कर हमारे विनाश की इच्छा कर रहा है, वह पिशाच अपनी संतान सहित कष्ट भोगे तथा यह पुरुष आरोग्य को प्राप्त करे. (६)

EN English Translation

O agni! The vampire who is wishing to destroy us by dissolving the flesh of this man in raw, pucca and mottled vessels, especially cooked and raw, pucca food, that vampire should suffer with his children and this man should attain health. (6)

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