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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 29 • Mantra 9

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 29 • मन्त्र 9

5.29.9

Mantra ID: 5.29.9

दिवा॑ मा॒ नक्तं॑ यत॒मो द॒दम्भ॑ क्र॒व्याद्या॑तू॒नां शय॑ने॒ शया॑नम् । तदा॒त्मना॑ प्र॒जया॑ पिशा॒चा वि या॑तयन्तामग॒दो॒यम॑स्तु ॥ (९)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.29.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! मुझे रात और दिन में यात्रा करते समय और सोते समय जिस मांस भक्षी पिशाच ने पीड़ित किया है, वह अपनी संतान सहित कष्ट भोगे तथा यह पुरुष नीरोग हो जाए. (९)

EN English Translation

O agni! The meat-eating vampire who has afflicted me while traveling at night and day and sleeping, suffers along with his child and this man becomes healthy. (9)

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