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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 30 • Mantra 13

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 30 • मन्त्र 13

5.30.13

Mantra ID: 5.30.13

ऐतु॑ प्रा॒ण ऐतु॒ मन॒ ऐतु॒ चक्षु॒रथो॒ बल॑म् । शरी॑रमस्य॒ सम्वि॑दां॒ तत्प॒द्भ्यां प्रति॑ तिष्ठतु ॥ (१३)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.30.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इस पुरुष को प्राण, नेत्र और बल प्राप्त हों. मैं ने इस के शरीर को मंत्र शक्ति के द्वारा प्राण युक्त किया है. वह अपने पैरों पर खड़ा हो जाए. (१३)

EN English Translation

May this man get life, eyes and strength. I have enriched the body of this prana through mantra power. Let him stand on his feet. (13)

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