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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 30 • Mantra 9

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 30 • मन्त्र 9

5.30.9

Mantra ID: 5.30.9

अ॑ङ्गभे॒दो अ॑ङ्गज्व॒रो यश्च॑ ते हृदयाम॒यः । यक्ष्मः॑ श्ये॒न इ॑व॒ प्राप॑प्तद्व॒चा सा॒ढः प॑रस्त॒राम् ॥ (९)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.30.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

तेरे शरीर में व्याप्त ज्वर, तेरा हृदय रोग एवं यक्ष्मा रोग_ये सभी मेरे मंत्र रूपी बाणों से तिरस्कृत हो कर उड़ने वाले बाज पक्षी के समान दूर जा कर गिरे हैं. (९)

EN English Translation

The fever in your body, your heart disease and tuberculosis disease have all fallen away like a flying eagle bird, despised by the arrows of my mantra. (9)

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