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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 31 • Mantra 8

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 31 • मन्त्र 8

5.31.8

Mantra ID: 5.31.8

यां ते॑ कृ॒त्यां कूपे॑ऽवद॒धुः श्म॑शा॒ने वा॑ निच॒ख्नुः । सद्म॑नि कृ॒त्यां यां च॒क्रुः पुनः॒ प्रति॑ हरामि॒ ताम् ॥ (८)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.31.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे कृत्या! अभिचार करने वाले ने तुझे कुएं में, श्मशान में अथवा घर में स्थित किया है. हम तुझे उसी की और लौटाते हैं, जिस ने अभिचार कर के तुझे भेजा है. (८)

EN English Translation

O act! The one who meditates has placed you in the well, in the crematorium or in the house. We return you to him who sent you. (8)

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