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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 8 • Mantra 6

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 8 • मन्त्र 6

5.8.6

Mantra ID: 5.8.6

यदि॑ प्रे॒युर्दे॑वपु॒रा ब्रह्म॒ वर्मा॑णि चक्रि॒रे । त॑नू॒पानं॑ परि॒पाणं॑ कृण्वा॒ना यदु॑पोचि॒रे सर्वं॒ तद॑र॒सं कृ॑धि ॥ (६)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.8.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे देव! हमारे शत्रुओं ने तनुपान एवं परिपाण नामक कर्म के समय अपने मंत्रमय कवचों को सिद्ध कर लिया है. तुम इन कर्मों से संबंधित मंत्रों को असफल बनाओ. (६)

EN English Translation

O God! Our enemies have proved their mechanistic armor at the time of action called Tanupan and Paripan. You make the mantras related to these deeds unsuccessful. (6)

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