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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 8 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 8 • मन्त्र 7

5.8.7

Mantra ID: 5.8.7

यान॒साव॑तिस॒रांश्च॒कार॑ कृ॒णव॑च्च॒ यान् । त्वं तानि॑न्द्र वृत्रहन्प्र॒तीचः॒ पुन॒रा कृ॑धि॒ यथा॒मुं तृ॒णहा॒ञ्जन॑म् ॥ (७)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.8.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वृत्र राक्षस का नाश करने वाले इंद्र! हमारे शत्रु ने जिन योद्धाओं को आगे की ओर बढ़ाया है, उन्हें तुम पीछे धकेल दो, जिस से मैं शत्रु की सेना का विनाश कर सकूं. (७)

EN English Translation

O Indra, who destroyed the demon Vritra! Push back the warriors that our enemy has extended forward, so that I can destroy the enemy's army. (7)

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