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अथर्ववेद

Kanda 5 • Sukta 9 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 5 • सूक्त 9 • मन्त्र 7

5.9.7

Mantra ID: 5.9.7

सूर्यो॑ मे॒ चक्षु॒र्वातः॑ प्रा॒णो॒न्तरि॑क्षमा॒त्मा पृ॑थि॒वी शरी॑रम् । अ॒स्तृ॒तो नामा॒हम॒यम॑स्मि॒ स आ॒त्मानं॒ नि द॑धे॒ द्यावा॑पृथि॒वीभ्यां॑ गोपी॒थाय॑ ॥ (७)

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अथर्ववेद मन्त्र 5.9.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वायु मेरे नेत्र हैं, वायु मेरा प्राण है, अंतरिक्ष के अधिष्ठाता देव मेरी आत्मा हैं और पृथ्वी मेरा शरीर है. मैं अमर अथवा मृत्युरहित नाम वाला हूं. हे द्यावा पृथ्वी! मैं अपनी आत्मा को सुरक्षा के निमित्त आपके सामने समर्पित करता हूं. (७)

EN English Translation

Air is my eyes, air is my soul, god, the presiding deity of space, is my soul and earth is my body. I am immortal or a nameless. O earth! I dedicate my soul to you for safety. (7)

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