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अथर्ववेद

Kanda 6 • Sukta 102 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 6 • सूक्त 102 • मन्त्र 1

6.102.1

Mantra ID: 6.102.1

यथा॒यं वा॒हो अ॑श्विना स॒मैति॒ सं च॒ वर्त॑ते । ए॒वा माम॒भि ते॒ मनः॑ स॒मैतु॒ सं च॑ वर्तताम् ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 6.102.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अश्विनीकुमारो! भलीभांति सिखाया हुआ घोड़ा जिस प्रकार सवार की इच्छा के अनुसार चलता है और उस के अधीन रहता है. हे कामिनी! उसी प्रकार तेरा मन मुझ कामुक को लक्ष्य कर के आए और मेरे अधीन रहे. (१)

EN English Translation

O Ashwinikumaro! The way a well-taught horse moves according to the will of the rider and lives under him. O Kamini! In the same way, your mind should aim at me and be under me. (1)

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