Atharvaveda Quick Jump
Navigate to any Kanda or Mantra
6.12.1
परि॒ द्यामि॑व॒ सूर्योऽही॑नां॒ जनि॑मागमम् । रात्री॒ जग॑दिवा॒न्यद्धं॒सात्तेना॑ ते वारये वि॒षम् ॥ (१)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
अथर्ववेद मन्त्र 6.12.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
जिस प्रकार सूर्य अंतरिक्ष में व्याप्त होता है, उसी प्रकार मैं सर्पो के जन्म को जानता हूं. जिस प्रकार रात्रि अपने अंधकार से सारे संसार को व्याप्त कर लेती है, उसी प्रकार शरीर में व्याप्त विष को मैं ओषधि से दूर करता हूं. (१)
EN English Translation
Just as the sun pervades space, I know the birth of serpents. Just as the night pervades the whole world with its darkness, in the same way, I remove the poison in the body with medicine. (1)