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अथर्ववेद

Kanda 6 • Sukta 122 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 6 • सूक्त 122 • मन्त्र 3

6.122.3

Mantra ID: 6.122.3

अ॒न्वार॑भेथामनु॒संर॑भेथामे॒तं लो॒कं श्र॒द्दधा॑नाः सचन्ते । यद्वां॑ प॒क्वं परि॑विष्टम॒ग्नौ तस्य॒ गुप्त॑ये दम्पती॒ सं श्र॑येथाम् ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 6.122.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पतिपत्नी! परलोक में हित करने वाला कर्म आरंभ करो तथा इस के पश्चात संयुक्त हो जाओ. कर्मफल के रूप में प्राप्त होने वाले स्वर्ग आदि लोकों में श्रद्धा रखते हुए तुम दोनों सेवा करो. (३)

EN English Translation

O husband and wife! Start the work that benefits the hereafter and after this become united. Both of you should serve by keeping faith in the worlds of heaven etc. which are received as the fruit of karma. (3)

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