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अथर्ववेद

Kanda 6 • Sukta 123 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 6 • सूक्त 123 • मन्त्र 2

6.123.2

Mantra ID: 6.123.2

जा॑नी॒त स्मै॑नं पर॒मे व्योम॒न्देवाः॒ सध॑स्था वि॒द लो॒कमत्र॑ । अ॑न्वाग॒न्ता यज॑मानः स्व॒स्तीष्टा॑पू॒र्तं स्म॑ कृणुता॒विर॑स्मै ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 6.123.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे यजमान के साथ स्वर्ग में बैठने वाले देवो! उस स्वर्ग में इस यजमान को जानना. यह यजमान उस हवि रूपी विधि का अनुगमन करता हुआ आएगा. इस यजमान को तुम स्वर्गलोक में पहचान लेना. (२)

EN English Translation

O gods who sit in heaven with the host! To know this host in that heaven. This host will come following that havi-like method. You should recognize this host in heaven. (2)

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